श्री सूर्य चालीसा : Surya Chalisa in Hindi | Surya Chalisa PDF Download 2023

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हेलो, दोस्तों, आज के इस पोस्ट में हम लोग देखेंगे सूर्य चालीसा के बारे में, जैसा कि आप सभी को पता है पृथ्वी पर जीवन सूर्य से ही संभव है,और संपूर्ण संसार के ऊर्जा का मुख्य स्रोत सूर्य ही है |

पुरानी मान्यताओं के अनुसार जिनकी कुंडली में सूर्य का ग्रह मजबूत होता है उसे उसके जीवन में किसी भी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है,

अगर किसी के कुंडली में सूर्य देव मजबूत है तो उन्हें अपने सभी बड़ों से मान सम्मान आशीर्वाद और हर प्रकार के सहयोग की प्राप्ति होती है और जिनकी कुंडली में सूर्य की स्थिति कमजोर होती है,

उन लोगों को भगवान सूर्य देव की पूजा अर्चना हमेशा सूर्य ग्रह की स्थिति को शुद्ध करते हुए करते रहना चाहिए, ऐसा करने से उनके सभी बिगड़े हुए कार्य बनने के बहुत ही ज्यादा अवसर होते हैं |

सूर्य चालीसा भगवान सूर्य देव को समर्पित एक ऐसी प्रार्थना है जिसे हिंदू धर्म में बहुत ही अधिक पूजनीय माना जाता है और सूर्य चालीसा एक 40 श्लोक का भजन है, इसलिए इसे सूर्य चालीसा कहा जाता है इस श्लोक में सूर्य देवता की स्तुति या नमन किया जाता है |

सूर्य चालीसा एक बहुत ही प्रभावशाली मंत्र होता है और इसके पाठ करने से सूर्य देवता प्रसन्न होते हैं|

आई अब यहां से सूर्य चालीसा के बारे में डिटेल में देखना शुरू करते हैं,

Surya Chalisa Pdf
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Surya Chalisa PDF Overview Details :-

Pdf NameSurya Chalisa Pdf
Pdf Size70 kb
No of Page 8
Language Hindi
Pdf Category Religious
Surya Chalisa Pdf

Surya Chalisa Mantra Pdf

सूर्य देवता का चालीसा :-

भगवान सूर्य देव के चालीसा का पाठ करने के अलावा भगवान सूर्य देव के कुछ ऐसे विशेष मंत्र होते हैं जिनका उच्चारण करने से भगवान सूर्य देव को प्रसन्न किया जा सकता है |

भगवान श्री देव की यह मंत्र बहुत ही प्रभावशाली और कारगर होते हैं, में विशेष मित्रों का जाप करने से व्यक्ति में ऊर्जा का प्रवाह संचार होता है,

निरंतर जैसे-जैसे भगवान सूर्य देव के समय का सूर्य का प्रकाश तेज बढ़ता जाता है निरंतर वैसे ही व्यक्ति के जीवन में उसके कार्यों का सफल परिणाम निरंतर उन्नति और प्रगति पर दिखाई देने लगता है |

Surya Chalisa Pdf :-

ऊँ हृां हृीं सः सूर्याय नमः।
ऊँ घृणिः सूर्य आदिव्योम।
शत्रु नाशाय ऊँ हृीं हृीं सूर्याय नमाः।
सूर्यदेव का बीज मंत्र. ..
ॐ हराम हरिम ह्रौं सह सूर्याय नमः।

Surya Chalisa Pdf Lyrics :- सूर्य चालीसा अर्थ सहित

दोहा
कनक बदन कुंडल मकर, मुक्ता माला अंग।
पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के संग।।

अर्थ भावार्थ सहित : – हे सूर्य देवता, ” स्वर्ण के समान दीप्तिमान शरीर वाले सूर्य देवता , जिनके कानो में मकर के कुन्डन है , अपने गले में मोतियों का हार पहने हैं , सूर्य भगवान ,कमल की मुद्रा में बैठे हुए,मैं अपने हाथो में चक्र और शंख धारण करके आपकी पूजा करता हू ।

– : Surya Chalisa Pdf :-

-: चौपाई :-

जय सविता जय जयति दिवाकर, सहस्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर।
भानु, पतंग, मरीची, भास्कर, सविता, हंस, सुनूर, विभाकर।

विवस्वान, आदित्य, विकर्तन, मार्तण्ड, हरिरूप, विरोचन।
अंबरमणि, खग, रवि कहलाते, वेद हिरण्यगर्भ कह गाते।
सहस्रांशु, प्रद्योतन, कहि कहि, मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि।
अरुण सदृश सारथी मनोहर, हांकत हय साता चढ़ि रथ पर।
मंडल की महिमा अति न्यारी, तेज रूप केरी बलिहारी।
उच्चैश्रवा सदृश हय जोते, देखि पुरन्दर लज्जित होते।
मित्र, मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर, सविता,
सूर्य, अर्क, खग, कलिहर, पूषा, रवि,
आदित्य, नाम लै, हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै।
द्वादस नाम प्रेम सो गावैं, मस्तक बारह बार नवावै।
चार पदारथ सो जन पावै, दुख दारिद्र अघ पुंज नसावै।
नमस्कार को चमत्कार यह, विधि हरिहर कौ कृपासार यह।
सेवै भानु तुमहिं मन लाई, अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई।
बारह नाम उच्चारन करते, सहस जनम के पातक टरते।
उपाख्यान जो करते तवजन, रिपु सों जमलहते सोतेहि छन।
छन सुत जुत परिवार बढ़तु है, प्रबलमोह को फंद कटतु है।
अर्क शीश को रक्षा करते, रवि ललाट पर नित्य बिहरते।
सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत, कर्ण देश पर दिनकर छाजत।
भानु नासिका वास करहु नित, भास्कर करत सदा मुख कौ हित।
ओठ रहैं पर्जन्य हमारे, रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे।
कंठ सुवर्ण रेत की शोभा, तिग्मतेजसः कांधे लोभा।
पूषा बाहु मित्र पीठहिं पर, त्वष्टा-वरुण रहम सुउष्णकर।
युगल हाथ पर रक्षा कारन, भानुमान उरसर्मं सुउदरचन।
बसत नाभि आदित्य मनोहर, कटि मंह हंस, रहत मन मुदभर।
जंघा गोपति, सविता बासा, गुप्त दिवाकर करत हुलासा।
विवस्वान पद की रखवारी, बाहर बसते नित तम हारी।
सहस्रांशु, सर्वांग सम्हारै, रक्षा कवच विचित्र विचारे।

अस जोजजन अपने न माहीं, भय जग बीज करहुं तेहि नाहीं।
दरिद्र कुष्ट तेहिं कबहुं न व्यापै, जोजन याको मन मंह जापै।
अंधकार जग का जो हरता, नव प्रकाश से आनन्द भरता।
ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही, कोटि बार मैं प्रनवौं ताही।
मंद सदृश सुतजग में जाके, धर्मराज सम अद्भुत बांके।
धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा, किया करत सुरमुनि नर सेवा।
भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों, दूर हटत सो भव के भ्रम सों।
परम धन्य सो नर तनधारी, हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी।
अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन, मध वेदांगनाम रवि उदय।
भानु उदय वैसाख गिनावै, ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै।
यम भादों आश्विन हिमरेता, कातिक होत दिवाकर नेता।
अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं, पुरुष नाम रवि हैं मलमासहिं।

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-: दोहा :-
भानु चालीसा प्रेम युत, गावहिं जे नर नित्य।
सुख संपत्ति लहै विविध, होंहि सदा कृतकृत्य।।

-: Surya Dev ko Prasann karne ke upay :-
  1. प्रातः सुबह स्नान करके सूर्योदय के समय सूर्य भगवान को जल चढ़ाएं |
  2. सूर्य देवता को प्रसन्न करने के लिए तांबे के कलश में जल ले साथ ही साथ लाल चंदन और गुलाब का फूल डालकर के सूर्य देवता को अर्पण करें |
  3. प्रत्येक रविवार को सूर्य देवता की पूजा अवश्य ही करें| क्योंकि रविवार सूर्य देवता का वार होता है इसलिए सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए रविवार को उनकी पूजा करने का प्राचीन विधान है |
  4. प्रातः सूर्य भगवान के उदय होने के समय जल अर्पित करने से निश्चित ही सूर्य देवता प्रसन्न होते हैं |
  5. अपने ऊपर सूर्य देवता के प्रभाव को बनाए रखने के लिए अपने आप को मजबूत करने के लिए आप अपने दाहिने हाथ में कड़ा भी पहन सकते हैं|
  6. सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए उनके सूर्य चालीसा के पाठ को अवश्य करें|
  7. सूर्य देवता की चालीसा
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-: Surya Chalisa ke Path karne ke fayde :-

  • सूर्य देवता के चालीसा का पाठ करने से हर घर में सुख सुविधा की वृद्धि होती है|
  • सूर्य देवता के चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति तेजस्वी, ओजस्वी, तथा सफल जरूर होता है
  • सूर्य देवता के चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति में जूस और उत्साह का संचार होता है
  • सूर्य देव की चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के अंदर आत्मविश्वास की वृद्धि होती है,और व्यक्ति हर क्षेत्र में दिन दुनारात चौगुना वृद्धि करता जाता है |
  • सूर्य चालीसा का पाठ करने से संपन्नता और मान सम्मान प्रतिष्ठा में बढ़ोतरी होती है|
  • सूर्य देव का चालीसा का पाठ करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है|
  • सूर्य देव की चालीसा का पाठ करने से शत्रु का नाश होता है |

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भगवान सूर्य देव को जल चढ़ाते समय ध्यान देने योग्य कुछ ऐसी महत्वपूर्ण बातें :

  1. प्रतिदिन सुबह सूर्योदय के समय भगवान सूर्य देव को जल चढ़ाने से सूर्य देव बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं|
  2. भगवान सूर्य देव को जल चढ़ाते समय ब्रह्म मुहूर्त में ही जल चढ़ाना चाहिए|
  3. हमेशा सूर्य देव को जल चढ़ाते समय कलश से ही जल चढ़ाये |
  4. सूर्य देव को जल चढ़ाते समय जल में लाल चंदन या गुलाब का फूल भी डालें साथ ही साथ सूर्य देव को जल चढ़ाते समय जल दोनों हाथों की हथेलियां से होता हुआ नीचे गिरना चाहिए |
  5. भगवान सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए गिरते हुए जल की धारा से सूर्य के दर्शन करें |
  6. गिरते हुए जल से सूर्य की किरणें शरीर पर अगर पड़ती है तो सूर्य देव का आशीर्वाद और कृपा दोनों ही प्राप्त होता है|

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प्रभु सूर्य देव के 12 नाम और 12 मंत्र एक साथ (Surya Dev Mantra):-

भगवान सूर्य देव के मंत्र का जाप हर रविवार को 108 बार, 21 बार, 11 बार, की संख्या में करना चाहिए |

  • ॐ सूर्याय नम:।
  • ॐ मित्राय नम:।
  • ॐ रवये नम:।
  • ॐ भानवे नम:।
  • ॐ खगाय नम:।
  • ॐ पूष्णे नम:।
  • ॐ हिरण्यगर्भाय नम:।
  • ॐ मारीचाय नम:।
  • ॐ आदित्याय नम:।
  • ॐ सावित्रे नम:।
  • ॐ अर्काय नम:।
  • ॐ भास्कराय नमः।

-: सूर्य देव को जल चढ़ाते समय उच्चारण होने वाले कुछ प्रभावशाली मंत्र :-

प्रथम मंत्र :-

ओउम् ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजोराशे जगत्पते।
अनुकंपये माम भक्त्या गृहणार्घ्यं दिवाकर:।।

द्वितीय मंत्र :-


ॐ घृणि: सूर्य आदित्य नम:।

Conclusion ( सारांश ) :-

दोस्तों आज के इस पोस्ट में हमने आपको भगवान सूर्य देव से संबंधित काफी सारी जानकारी देने का प्रयास किया है और यह सारी जानकारी जो है आपको एकदम ऑथेंटिक और जेनुइन दी गई है |

इस जानकारी की मदद से आप सूर्य चालीसा पीडीएफ को अपने मोबाइल, लैपटॉप कंप्यूटर, में भी डाउनलोड करके इसका हमेशा इस्तेमाल कर सकते हैं |

Surya Chalisa Pdf

FAQs About Surya Chalisa PDF

प्रश्न 1:- सूर्य चालीसा का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?

उत्तर :- दोस्तों वैसे तो आप सूर्य चालीसा का पाठ हर दिन भी कर सकते हैं, परंतु प्रतीक रविवार के दिन इसका पाठ करना सबसे अधिक प्रभावशाली और कारगर माना जाता है |

रविवार के दिन प्रात स्नान करने के बाद भगवान सूर्य के उदय होने के समय सूर्य देवता को जल अर्पित करना चाहिए और साथ ही साथ पूरब दिशा की तरफ मुंह करके 108 बार सूर्य देवता का जाप करना चाहिए |

प्रश्न 2 :- सूर्य चालीसा का जाप कितनी बार करना चाहिए?

उत्तर :- दोस्तों सूर्य देवता को प्रसन्न करने के लिए उनके मंत्र का जाप कम से कम 11, 21 और 108 बार इसका जाप करना चाहिए |

प्रश्न 3:- सूर्य चालीसा का पाठ करने का लाभ क्या होता है?

उत्तर :- सूर्य को पूरे ब्रह्मांड का ऊर्जा का स्रोत माना जाता है, सूर्य देवता की पूजा पाठ करने से आपके जीवन में आने वाली सभी कठिनाइयों का नाश होता है और साथ ही साथ आपके शत्रुओं का विनाश होता है आपकी मनोकामना पूर्ण होती है,

इसके अलावा आपके सभी ऐसी बीमारियों को नाश होता है जो आपके काफी समय से आपके शरीर में बने हुए थे |

प्रश्न 4:- सूर्य देवता की पूजा स्त्री और पुरुष किसको करना चाहिए?

उत्तर :- सूर्य चालीसा का पाठ स्त्री और पुरुष दोनों कर सकते हैं | दोनों को बराबर लाभ मिलता है

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