Ahoi Ashtami Vrat Katha in Hindi Pdf ( अहोई अष्टमी व्रत कथा )

दोस्तों, आज के इस पोस्ट में ” अहोई अष्टमी व्रत कथा ” ( Ahoi Ashtami Vrat Katha in Hindi Pdf Download करने का लिंक निचे दिया गया हैं. जिसमें अहोई अष्टमी व्रत कथा के बारे में विस्तृत रूप से वर्णन किया गया हैं |

Ahoi Ashtami Vrat Katha in Hindi Pdf Download

परिचय :- दोस्तों, भारतीय परंपरा के अनुसार अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन पूरे भारतवर्ष में धूमधाम से सभी माताएँ मनाती है |

अहोई अष्टमी का व्रत सभी माताएं अपने सभी संतानों के लंबी उम्र के लिए आयु के लिए रखती हैं |

भारतीय संस्कृति में व्रत और त्योहारों का बहुत ही बड़ा महत्व होता है, यह धार्मिक अवसर समाज को एक साथ एकजुट करने का कार्य करती है और भारतीय संस्कृति के धार्मिक मूल्यों को प्रमुख रूप से प्रस्तुत करती है|

भारतीय परंपरा के सभी व्रतों में से एक प्रमुख व्रत अहोई अष्टमी का व्रत बड़ा ही विशेष महत्व रखता है| यह व्रत मां अहोई की कृपा प्राप्ती के लिए किया जाता है |

मां अहोई की कृपा से सभी व्रतार्थियों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है, इस व्रत कथा के माध्यम से आइए हम जानते हैं

कि अहोई अष्टमी व्रत की प्रसिद्ध कथा जो हमारे जीवन को सफलता सुख शांति से भर देती है इसके बारे में विस्तृत वर्णन करते हैं |

Ahoi Ashtami Vrat Katha (अहोई अष्ठमी व्रत कथा )

अहोई अष्टमी का त्यौहार पूरे भारत में से ज्यादातर अधिकतर उत्तरी भारत में मनाया जाता है और यह व्रत करवा चौथ के बाद ही मनाया जाता है |

अहोई अष्टमी व्रत में सभी माताएं अपने सभी संतान अपने बच्चे,बच्चियों के लिए उपवास रखती हैं| अहोई अष्टमी व्रत में सभी माताएँ अपने सभी सन्तानो की भलाई और उनके लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं |

इस व्रत के दौरान सभी माताएं सुबह प्रातः काल से लेकर शाम तक उपवास रखती हैं | शाम को रात होने के बाद आकाश में तारों को देखकर उपवास को तोड़ा जाता है |

हालांकि उपवास के दौरान यह जो शाम होती है यह जो रात होती है इस रात में लम्बे समय के बाद चन्द्रमा आकाश में दिखाई देता है, तब जाकर उपवास को तोड़ा जाता है

अहोई अष्टमी व्रत का महत्व :- अहोई अष्टमी व्रत कथा का महत्व भारतीय परंपरा के अनुसार सभी व्रत कथाओ में अपने संतान की सुरक्षा और लंबी आयु के लिए की जाने वाली पूजाओं में उत्तम माना जाता है | अहोई अष्टमी व्रत दीपावली से तकरीबन 8 दिन पहले अहोई व्रत मनाया जाता है |

Ahoi Ashtami Vrat Katha in Hindi Pdf Overview details :-

PDF NameAhoi Ashtami Vrat Katha in Hindi PDF
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Language Hindi
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Download Yes
PDF Category Religious
Ahoi Ashtami Vrat Katha
Ahoi Ashtami Vrat Katha in Hindi PDF ( अहोई अष्टमी माता जी की आरती )
Ahoi Ashtami Vrat Katha in Hindi Pdf
Ahoi Ashtami Vrat Katha

Ahoi Ashtami Vrat katha

जय अहोई माता, जय अहोई माता ।

तुमको निसदिन ध्यावतहर विष्णु विधाता ॥

॥ जय अहोई माता..॥

ब्रह्माणी, रुद्राणी, कमलातू ही है जगमाता ।

सूर्य-चन्द्रमा ध्यावतनारद ऋषि गाता ॥

॥ जय अहोई माता..॥

माता रूप निरंजनसुख-सम्पत्ति दाता ।

जो कोई तुमको ध्यावतनित मंगल पाता ॥

॥ जय अहोई माता..॥

तू ही पाताल बसंती, तू ही है शुभदाता ।

कर्म-प्रभाव प्रकाशकजगनिधि से त्राता ॥

॥ जय अहोई माता..॥

जिस घर थारो वासावाहि में गुण आता ।

कर न सके सोई कर लेमन नहीं धड़काता ॥

॥ जय अहोई माता..॥

तुम बिन सुख न होवेन कोई पुत्र पाता ।

खान-पान का वैभवतुम बिन नहीं आता ॥

॥ जय अहोई माता..॥

शुभ गुण सुंदर युक्ताक्षीर निधि जाता ।

रतन चतुर्दश तोकूकोई नहीं पाता ॥

॥ जय अहोई माता..॥

श्री अहोई माँ की आरतीजो कोई गाता ।

उर उमंग अति उपजेपाप उतर जाता ॥

जय अहोई माता, जय अहोई माता ।

Ahoi Ashtami Vrat katha :– (अहोई अष्टमी व्रत का वृतांत )

बहुत ही प्राचीन मान्यता के अनुसार, किसी नगर में एक पंडित जी हुआ करते थे जो अपनी पत्नी और सभी 5 बच्चों के साथ रहा करते थे,

पंडित जी की पत्नी पंडिताइन भगवान का कोई भी व्रत रखती थी लेकिन सच्चे मन और सच्ची श्रद्धा से नहीं रखती थी व्रत रखती थी

एक दिन पंडिताइन घर को लिखने के लिए मिट्टी लाने के लिए खदान में गई वहां खदान से मिट्टी निकालते समय उनके कुदाल से एक बच्चे की मृत्यु हो गई,

उसके बाद पंडिताइन इस बात को अपने परिवार में किसी से शेयर नहीं किया, तत्पश्चात कुछ समय बीतने के बाद पंडिताइन के पांचों पुत्र एक-एक करके मरने लगे अर्थात मृत्यु होने लगी,

पंडित जी और पंडिताइन को इस बात का पता नहीं चल पा रहा था कि आखिर किस कारण से उनकी संतानों का मृत्यु हो रहा है रोते बिलखते हुए पंडिताइन ने अपने अपनी बातों को अपने गांव वालों से कहीं,

गांव की कुछ संभ्रांत महिलाओं ने उन्हें बताया कि जरूर कोई ना कोई गलती आपने किया होगा जो आपको याद नहीं आ रहा है और उसी गलती की वजह से आपकी संतान मर रहे हैं,

तो पंडिताइन ने बताया कि हां खदान में मिट्टी लाते समय उनके कुदाल से एक बच्चे की मृत्यु हो गई थी

तब संभ्रांत महिलाओं ने बताया कि आप जो है माता अहोई की पूजा सच्ची श्रद्धा और शांत मन से प्रार्थना किया जाए उपवास किया जाए व्रत रखा जाए तो माता अहोई जी की कृपा से आपके सारे संतान पुनः जीवित हो सकते हैं

और माता की कृपा से सारे दुख कष्ट सही हो जाएंगे, उसके बाद पंडिताइन ने ठीक है

ऐसा ही किया और उनकी सभी संतान एक-एक करके वापिस माता जी की कृपा से जीवित हो उठे और उसके बाद पंडिताइन ने माता जी के गुणगान की सभी बातें सुनाने लगे|

अहोई अष्टमी की पूजन विधि:-

  • अहोई अष्टमी के दिन सभी माताएं सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करते हैं और व्रत रखने का संकल्प करती हैं
  • अहोई माता की पूजा शाम के समय शुभ मुहूर्त में ही करनी होती है,
  • अहोई माता की पूजा अर्चना के लिए दीवाल पर अहोई माता का चित्र बनाकर सच्ची श्रद्धा और शांत मन से पूजा करनी चाहिए
  • अहोई अष्टमी के दिन सभी माताएं अपनी संतानों के लिए निर्जला का व्रत रखती हैं अर्थात बिना पानी पिए निर्जला व्रत रखा जाता है और शाम के समय या यूं कहें कि प्रदोष काल में इनकी पूजा अर्चना की जाती है,
  • शाम को अहोई माता को फूल फल और मिठाई का भोग लगाना चाहिए और फिर शाम को चंद्रमा और तारे निकलने के बाद उसको अर्घ्य दिया जाता है
  • तत्पश्चात अहोई माता का व्रत का समापन रात्रिकालीन में किया जाता है और फिर अहोई माता की व्रत कथा और सभी को सुनाई जाती है,
  • इसके बाद सभी माताएं अन्य जो जल ग्रहण है या जो भी अपना खाना पीना होता है वह करती है,

कुछ प्रमुख कथाओं का वर्णन :-

अहोई अष्टमी व्रत कथा की प्रसिद्ध कथाओं के बारे में आइए चर्चा करते हैं :-

Ahoi Ashtami Vrat Katha:-

1.भक्त ध्रुव की कथा:- बहुत प्राचीन समय की बात है एक राज कुमार ध्रुव हुआ करते थे जो अपने पिता के प्रेम में बहुत ही मशगूल थे


अपने पिता की दूसरी रानी के कारण या यूं कहें कि अपनी सौतेली मां के कारण ध्रुव को राजगद्दी से वंचित कर दिया गया था


इस घटना की वजह से ध्रुव के अंदर अपने जीवन को खो देने की इच्छा हुआ करती थी अर्थात अंदर से वह पूरी तरीके से एक दम टूट चुके थे |


तभी किसी के सलाह पर ध्रुव ने मां अहोई की उपासना करने का संकल्प किया दृढ़ निश्चय किया और और निरंतर सच्चे मन और श्रद्धा भाव से ध्रुव ने अहोई माता की पूजा अर्चना करना प्रारंभ कर दिया |


कुछ समय अंतराल के बाद माता अहोई की कृपा ध्रुव पर प्राप्त हुई और ध्रुव को उनके वंचित गद्दी फिर से प्राप्त हुआ |


और वह अपने गद्दी पर विराजमान हुए, इस कथा से मां अहोई के प्रति भक्ति और तपस्या से हर प्रकार की कठिनाई का समाधान संभव होता है |

  1. Ahoi Ashtami Vrat Katha

2. भक्त मीराबाई की कथा :- हिंदी साहित्य में मीराबाई को कौन नहीं जानता | मीराबाई हिंदी साहित्य की महान संतों में से एक मानी जाती थी,

मीराबाई अपनी भक्ति के प्रति विश्वास और अपनी आवाज में अनुराग के लिए बहुत ही ज्यादा प्रसिद्ध थी,

मीराबाई ने अपने प्रेम भक्ति के माध्यम से हमेशा माँ अहोई को स्तुति दी, नमन किया और उन्हें अपने सभी संयम और अनुष्ठान के साथ पूजा-अर्चना करती रही,

मीराबाई ने अपने आत्मनिर्भर भक्ति के माध्यम से अपने जीवन को संचालित किया और एक विश्वास की प्रतीक बन गई,

मीराबाई की कथा से हमें यह अनुभव मिलता है कि जीवन में ईश्वर की भक्ति सच्चे और श्रद्धा मन से किया जाए तो हम सभी विकास कर सकते हैं और हमारा जीवन हमेशा सुख से भरा रहेगा |

Ahoi Ashtami Vrat Katha –

3. भक्त प्रहलाद की कथा :- प्रह्लाद एक ऐसे बालक थे जो भगवान की भक्ति में इतने लीन थे कि अपने भक्ति भाव, समर्पण, दृढ इच्छा से एक राक्षस परिवार में जन्म लेने के बाद भी अपनी भक्ति से भगवान को प्रसन्न किए और भगवान के शरण में चले गए |

प्रहलाद के पिता हिरण्यकश्यप जो कि एक राक्षसों के राजा थे, हिरण्यकश्यप कभी नहीं चाहते थे कि प्रहलाद भगवान की पूजा करें क्योंकि उनका मानना था कि

हिरनकश्यप अर्थात प्रह्लाद के पिता खुद एक भगवान है | परंतु प्रहलाद हमेशा भगवान की भक्ति में हमेशा पूजा अर्चना करते रहते थे

एक दिन हिरन्यकश्यप को बहुत गुस्सा आया और उसने उस दिन के बाद अपने बेटे प्रहलाद को हर प्रकार से यातनाये, दुःख देने लगा | तमाम सभी प्रकार के दुःखो, कष्टों को सहते हुवे भगवान की पूजा करते रहें. और अंततः भगवान प्रश्न हुवे और उनके सभी कष्ट दूर हुवे. |

Conclusion ( निष्कर्ष ):-

Ahoi Ashtami Vrat Katha –

दोस्तों आज के इस पोस्ट में हमने आपको अहोई अष्टमी व्रत कथा के बारे में संपूर्ण जानकारी देने का प्रयास किया है | साथ ही साथ Ahoi Ashtami Vrat Katha in Hindi Pdf डाउनलोड करने का लिंक भी ऊपर दिया गया है जिससे आप आसानी से अपने मोबाइल लैपटॉप या कंप्यूटर में डाउनलोड करके रख सकते हैं और उसको अपने समय पर जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल कर सकते हैं |

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FAQ ( Ahoi Vrat Katha Pdf in Hindi ) ( अहोई अष्टमी व्रत कथा से सम्बंधित पूछें जानें वाले प्रश्न
Ahoi Ashtami Vrat Katha
  1. प्रश्न :- अहोई अष्टमी व्रत क्या है?
    • अहोई अष्टमी व्रत भारतीय संस्कृति में माँ अहोई की कृपा के लिए किया जाने वाला धार्मिक व्रत है। यह व्रत हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन व्रतार्थी नीत नवीद्य बनाते हैं और माँ अहोई के मंदिर में चढ़ाते हैं।
  2. प्रश्न :- अहोई अष्टमी कथा की प्रमुख कथाएं कौन-कौन सी हैं?
    • अहोई अष्टमी कथा की प्रमुख कथाएं माँ अहोई, भक्त ध्रुव, भक्त प्रहलाद, और भक्त मीराबाई की हैं। इन कथाओं के माध्यम से यह सिखाया जाता है कि भक्ति और श्रद्धा से हम सभी जीवन के कठिनाईयों का सामना कर सकते हैं और ईश्वर की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
  3. प्रश्न :- अहोई अष्टमी व्रत कैसे किया जाता है?
    • अहोई अष्टमी व्रत को सूर्योदय से पूर्व आराम से उठकर आचार्य के मार्गदर्शन में व्रतार्थी नीत नवीद्य बनाते हैं। व्रतार्थी विधि-विधान के साथ व्रत का पालन करते हैं और माँ अहोई की पूजा करते हैं। व्रत के दौरान भक्ति भाव से भजन-कीर्तन करते हैं और माँ के चरणों में प्रार्थना करते हैं।
  4. प्रश्न :- अहोई अष्टमी व्रत का महत्व क्या है?
    • अहोई अष्टमी व्रत का पालन करने से व्रतार्थी को धार्मिक उन्नति, आर्थिक समृद्धि, सामाजिक संबंध, और मानसिक शांति मिलती है। व्रतार्थी को विभिन्न प्रकार के लाभ मिलते हैं और उनका जीवन समृद्धि से भर जाता है।
  5. प्रश्न :- अहोई अष्टमी व्रत को किस तरह से तैयारी किया जाता है?
    • अहोई अष्टमी व्रत के दिन व्रतार्थी विशेष रूप से त्योहार की तैयारी करते हैं। वे माँ अहोई के मंदिर में जाते हैं और उनके द्वारा तैयार किये गए नवीद्य को माँ के सामने चढ़ाते हैं। व्रतार्थी दिन भर भक्ति भाव से भजन-कीर्तन करते हैं और माँ की कृपा के लिए प्रार्थना करते हैं।
  6. प्रश्न :-अहोई अष्टमी व्रत के दौरान क्या किया जाता है?
    • अहोई अष्टमी व्रत के दौरान व्रतार्थी विधि-विधान के साथ व्रत का पालन करते हैं। वे व्रती नवीद्य बनाते हैं और माँ अहोई के मंदिर में चढ़ाते हैं। व्रतार्थी व्रत के दौरान पानी के उपवास में रहते हैं और सूर्यास्त के समय पूजा-अर्चना करते हैं।
  7. प्रश्न :- अहोई अष्टमी व्रत का महत्व किस कारण होता है?
    • अहोई अष्टमी व्रत का महत्व माँ अहोई की कृपा के लिए किया जाने वाला होता है। व्रतार्थी को व्रत के पालन से धार्मिक, आर्थिक, सामाजिक, और मानसिक लाभ प्राप्त होते हैं। व्रतार्थी का जीवन समृद्धि से भर जाता है और उन्हें ईश्वर की कृपा मिलती है।
  8. प्रश्न :- अहोई अष्टमी व्रत के दौरान क्या भोजन किया जाता है?
    • अहोई अष्टमी व्रत के दौरान व्रतार्थी पानी के उपवास में रहते हैं और सूर्यास्त के समय व्रत को खुलते हैं। उन्हें व्रत के दिन ग्रहों के अनुसार उपयुक्त भोजन करना चाहिए। व्रतार्थी व्रत के दौरान नृम्बुआ, चना, मूंगफली, सिंघाड़े का आटा, फल, सब्जियां, दही, गुड़, घी आदि खाते हैं। व्रत के दौरान अनाजी चीजें, नमक, प्याज़, लहसुन, मांस, अल्कोहल, तम्बाकू और अन्य अशुद्ध आहार का सेवन नहीं करना चाहिए।
  9. प्रश्न :- अहोई अष्टमी व्रत कथा को किस तरह से समाप्त किया जाता है?
    • अहोई अष्टमी व्रत को समाप्त करने के लिए व्रतार्थी को माँ अहोई के मंदिर में जाकर उनके समक्ष नवीद्य और पूजा सामग्री चढ़ाने के बाद व्रत को खोल देना चाहिए। व्रत को समाप्त करते समय व्रतार्थी को विधि-विधान के साथ व्रत का उद्धार करना चाहिए और माँ के चरणों में प्रार्थना करके व्रत को समाप्त करें।
  10. प्रश्न :- अहोई अष्टमी व्रत को किसलिए मनाया जाता है?
    • अहोई अष्टमी व्रत माँ अहोई की कृपा को प्राप्त करने के लिए मनाया जाता है। इस व्रत का पालन करने से व्रतार्थी को धार्मिक उन्नति, आर्थिक समृद्धि, सामाजिक संबंध, और मानसिक शांति मिलती है। व्रतार्थी का जीवन समृद्धि से भर जाता है और उन्हें ईश्वर की कृपा मिलती है।
  11. प्रश्न :- अहोई अष्टमी व्रत के दिन क्या नहीं किया जाता है?
    • अहोई अष्टमी व्रत के दिन व्रतार्थी को निम्बू, प्याज़, लहसुन, मांस, अल्कोहल, तम्बाकू और अन्य अशुद्ध आहार का सेवन नहीं करना चाहिए। व्रतार्थी को अनुचित विचारों, वाणी और कार्यों से बचना चाहिए और भक्ति भाव से माँ अहोई की पूजा करनी चाहिए।

यह थे “अहोई अष्टमी व्रत कथा” से संबंधित अहम सवालों के जवाब। आशा करता हूँ, इन्हें पढ़कर आपको अहोई अष्टमी व्रत से संबंधित सारी जानकारी मिल गई होगी। व्रत को सही ढंग से पालन करने से आप धार्मिक उन्नति और आनंद की प्राप्ति कर सकते हैं। इस सुयोग्य अवसर पर आपके और आपके परिवार को ढेर सारी शुभकामनाएं!

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